श्री सद्गुरुवे नमः
कब तक उलझोगी ससीम में
गुरुवचन क्यों भुला दिया ?
कहती थी समझा है मुझको,
कहां गया सब कहां गया?
बचपन का कुछ भी ना भूली,
गुरुवचन क्यों भुला दिया ?
कहती थी समझा है मुझको,
कहां गया सब कहां गया?
बचपन का कुछ भी ना भूली,
और न भूलि पहले का भी;
सबकुछ है संजोया दिल में ।
बिन पूछे उछल आता कभी भी।
सबकुछ है संजोया दिल में ।
बिन पूछे उछल आता कभी भी।
कबतक झूंझेगी संस्कारों से,
बेमतलब की बा ते हैं सब।
तेरे बस का नही है यह सब,
|करदे समूचा प्रभु को अर्पण ।
छोड दे पाने त्यागने की जिद
जो जैसे है रहने दे ;
जो भी समझा या ना समझा
भगवद अर्पण सब कर दे ।
जहां रखा जैसे भी रखा है;
आज के दिन का सत्य वही है।
नतमस्तक हो स्वीकार तू करले
उसका जीवन वह ही सवारे।
कब समझेगी
हर पल हरछिन यही बताया ।
उसका है यह जगत बावले,
वह ही उसमे पूर्ण समाया;
और न है अस्तित्व किसीका !
और तो कुछ सच है ही नही
मै मेरा और तू तेरा सब
मनगढंत इक सपना है !
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