Friday, 9 September 2022

श्री सद्‍गुरुवे नमः


कब  तक उलझोगी ससीम में
गुरुवचन क्यों भुला दिया ?
कहती थी समझा है मुझको,
कहां गया सब कहां गया?

बचपन का कुछ भी ना भूली,
और न भूलि पहले का भी;
सबकुछ है संजोया दिल में ।
बिन पूछे उछल आता कभी भी।

कबतक झूंझेगी संस्कारों से,
बेमतलब की बा ते हैं सब।
तेरे बस का नही है यह सब,
|करदे समूचा प्रभु को अर्पण ।
 

छोड दे पाने त्यागने की  जिद
 जो जैसे  है रहने दे ; 
जो भी समझा या ना समझा
 भगवद अर्पण  सब कर  दे  ।


जहां रखा  जैसे भी रखा है;
आज के दिन का सत्य वही है।
नतमस्तक हो स्वीकार तू करले
उसका जीवन  वह ही सवारे।

कब समझेगी 
हर पल हरछिन यही बताया ।

उसका है यह जगत बावले,
वह ही उसमे पूर्ण समाया;

और न है अस्तित्व किसीका !
और तो कुछ सच है ही नही
मै मेरा और तू तेरा सब
मनगढंत इक सपना है !




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